मृत्यु ऐसा कड़वा सच जिसे स्वीकारना मुश्किल नकारना तो है नामुमकिन। मृत्यु ऐसा कड़वा सच जिसे स्वीकारना मुश्किल नकारना तो है नामुमकिन।
आज कविता सरल सहज नहीं उसने अपने रंग, चलन, ढब बदल लिये आज कविता सरल सहज नहीं उसने अपने रंग, चलन, ढब बदल लिये
जब मुमकिन हो दो दूसरों का साथ घबराओ मत चलो थामे एक दूसरे का हाथ। जब मुमकिन हो दो दूसरों का साथ घबराओ मत चलो थामे एक दूसरे का हाथ।
तो बन गया ग्यारह ऐसे ही रहूंगा साथ में अपने एक ही दोस्त के तो बन गया ग्यारह ऐसे ही रहूंगा साथ में अपने एक ही दोस्त के
छोरों ना यार क्या रखा है कविता सुनाने में। छोरों ना यार क्या रखा है कविता सुनाने में।
सच परेशान नहीं हो रहा है परेशान कर रहा है और उसे परेशान करने दें। सच परेशान नहीं हो रहा है परेशान कर रहा है और उसे परेशान करने दें।